कपास की फसल में गुलाबी सुंडी होने पर करे यह काम

मेरे प्यारे किसान साथियों “आज हम कपास कि फसल में गुलाबी सुंडी के बारे में चर्चा करेंगे। दुनियाभर में कपास के मुख्य हानिकारक किटों मे शुमार यह गुलाबी सुंडी रात को सक्रिय रहने वाले ये पतंगें शमा के प्रेम में परवान चढ़ने वाले होते हैं। यह कीड़ा जुलाई से नवंबर तक सक्रिय रहता है इस कीट द्वारा पौधे के फूल व फल खा लिए जाने के कारण किसान इस कीट से भयभीत रहते हैं

लेकिन किसान इससे जितना भयभीत होता है वास्तव में यह कीट इतना नुकसान नहीं कर पाता। फसल में मौजूद कई किस्म के मासाहारी कीट इस कीट को नुकसान पहुंचाने के स्तर तक नहीं पहुंचने देते। पिछली बार इसलिए ज्यादा नुकसान हो गया क्योंकि पिछले कई सालों से यह नहीं थी तो इसको खाने वाले भी मासांहारी कीट भी कम थे और एकदम से इसका विस्फोट हो गया।

कपास की फसल में गुलाबी सुंडी का जीवनचक्र –

इस कीट की प्रौढ़ अवस्था यानि कि पतंगे आकार में छोटे व रंग में गहरे भूरे होते हैं। इसकी अगली पंखों पर काले धब्बे होते हैं तथा पिछली पंख किनारों से झालरनुमा होती हैं। हर साल कपास के खेत में इसके मादा पतंगों कि पहली पीढी तो बौकियों पर या फिर बौकियों के नजदीक टहनियों, छोटी व कच्ची पत्तियों के निचले हिस्सों पर एक एक करके सफेद व चपटे अंडे देती है। इसके बाद वाली पीढियां अपने अंडे एक एक करके ही फूलों के बाह्यपुंजदल पर देती हैं।

इस कीट कि यह सूंडी अवस्था लगभग 12 से 15 दिन की होती हैं। सामान्यतौर पर 3 से 4 दिनों मे इन अंडों से तरुण सूंडियां निकलती हैं। पर ताप व आब कि अनुकूलता अनुसार यह अंड-विस्फोटन आगे व पीछे भी हो सकता है प्रारंभिक अवस्था में ये सूंडियां क्रीम कलर की होती हैं परन्तु बाद में इनका रंग गुलाबी हो जाता है याद रहे यह रंगपलटी इन सूंडियों कि चौथी कायापलटी मे जाकर होती है।। कपास कि फसल में गुलाबी सुंडी ।

pink caterpillar का खानपान

गुलाबी सूंडियां कपास की फसल में बौकियों व फूलों पर हमला करती हैं सूंडियों से ग्रसित फूल पूरी तरह नहीं खुलते। कपास के ये ग्रसित फूल बनावट मे फिरकी या गुलाब के फूल जैसे हो जाते हैं। शुरुआती अवस्था में ही ये तरुण सूंडियां छोटे छोटे टिंड्डों मे घुसकर कच्चे बीजों को खाती हैं। टिंडे मे घुसने के लिए बनाए गए अपने सुराख को अपने मल से ही बंद कर देती हैं। कपास कि फसल में गुलाबी सुंडी ।

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गुलाबी सुंडी होने पर यह रखे सावधानियां

यहां एक बात पर गौर करिऐ कि मैंने सावधानियां लिखा है उपचार नहीं क्योंकि अभी तक गुलाबी सूंडी के लिए कोई जहर नहीं बना है ओर ना ही गुलाबी सूंडी के उपर किसी जहर का प्रभाव देखा गया है। तो सावधानी ही रख सकते हैं ।

1 पौधों से पौधों की दुरी सुनिश्चित करें ज्यादा संघन बिजाई ना करें अगर कर दी है तो उसे मेटेंन करें ज्यादा पौधे निकालर।

2 अगर आपको लगता है कि पौधों की लंबाई ज्यादा जाएगी तो पौधों को ऊपर से कांटे ।

3 पानी जरूरत के अनुसार ही लगाएं ज्यादा पानी नहीं देना।।

4 फर्टिलाइजर खासकर नाईट्रोजन का इस्तेमाल बहुत सोचसमझकर करें ।

5 पौधों में ज्यादा कच्चा पन ना लाएं। मोनो जैसे जहर की स्प्रे ना करें |

6 कोई भी जहर डालने से पहले दस बार सोचें।

7 जो भाई जहर प्रेमी है वो जहर वाले पैसे खुराक के ऊपर खर्च करें |

8. सबसे जरूरी ओर सख्त सावधानी व्हम से बचों और ज्यादा अफवाहो पर ध्यान मत दो |

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