जीरा भाव में तेज़ी 60 हजार पार आने वाले दिनों में जीरा में क्या रहेगा

जीरा भाव में तेज़ी दक्षिणी गुजरात के कई जिलों में हुई भारी वर्षा होने और बाढ़ आने के बाद भी चालू अगस्त महीने में राज्य में सामान्य की तुलना में 90 प्रतिशत कम वर्षा होने की सूचनाएं आ रही हैं। दूसरी ओर, हाल ही में आई मंदी के बाद आवक भी कमजोर बनी हुई है। लिवाली भी सुस्त ही बनी होने से आगामी समय में जीरा सीमित दायरे में घुमता रह सकता है।आप सुधि पाठकों को समय-समय पर जीरे की तेजी-मंदी के सम्बन्ध में नवीनतम जानकारियां मिलती रहती हैं और उन्हें इससे लाभ भी होता है।

चालू मानसून सीजन के दौरान दक्षिणी गुजरात में पिछले दिनों हुई भारी वर्षा के कारण द्वारका, नवसारी, सूरत और धोराजी जैसे क्षेत्रों में बाढ़ आ गई थी। प्राप्त सूचनाओं के अनुसार इस स्थिति के बाद भी चालू अगस्त महीने की अभी तक की अवधि में गुजरात में सामान्य की तुलना में करीब 90 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। उत्तरी गुजरात में अभी तक वर्षा सामान्य से कमजोर ही बताई जा रही है।

आज का जीरा का भाव jeera rates today

इसके अलावा जीरे में हाल ही में आई मंदी के बाद किसानों की बिकवाली सीमित हो गई है। यही वजह है कि ऊंझा मेंडी में जीरे की किसानी आवक नाममात्र को करीब 1-2 हजार बोरियों की ही हो रही है। यही वजह है कि वहां जीरे की कीमत हाल ही में मंदी होकर फिलहाल 11,700/11, 800 रुपए प्रति 20 किलोग्राम पर बनी हुई है। इसके विपरीत, स्थानीय थोक किराना बाजार में भी लिवाली कमजोर पड़ने से जीरा सामान्य 800 रुपए मंदा होकर फिलहाल 64/66 हजार रुपए प्रति क्विंटल पर बना हुआ है। इससे पूर्व इसमें 700 रुपए की मंदी आई थी। जीरा भाव में तेज़ी कब आयेगी।

कीमत में आई इस नवीनतम मंदी के कारण किसान अपनी इस फसल की बिक्री हाथ रोककर कर रहे हैं। आवक तुलनात्मक रूप से नीची बनी होने का प्रमुख कारण यह है कि बीते मार्च महीने में हुई वर्षा के कारण खासकर राजस्थान में फसल को हानि हुई थी। इसके अलावा बंगलादेश समेत अन्य परम्परागत आयातक देशों की ऊंझा मंडी में जीरे में सक्रियता बनी हुई है।

जीरा का निर्यात और विदेशी बाजार

हालांकि कीमत सामान्य से ऊंची होने के कारण उनकी खरीद सामान्य से कमजोर बताई जा रही है। दूसरी ओर, बीते सीजन के दौरान जीरे के उत्पादन में करीब एक तिहाई की गिरावट आने की आशंका के बाद से इसकी थोक कीमत ने रुक-रुककर नए-नए रिकॉर्ड कायम किए थे।

बड़ी चिंता की बात यह है कि समुद्री भाड़ा भी बीते कुछ समय के दौरान बढ़ता हुआ फिलहाल करीब 3 गुणा तक ऊंचा बना हुआ है। भाड़े की दर ऊंची होने के करण भी अन्य प्रमुख जिंसों के साथ-साथ जीरे की निर्यात का अभाव बना हुआ है।

भारत के अलावा विश्व में तुर्की और सीरिया को जीरे के अन्य उत्पादक देशों के रूप में जाना जाता है लेकिन अब अफगानिस्तान तथा ईरान भी चुनौती पेश करने लगे हैं। आमतौर पर तुर्की एवं सीरिया में संयुक्त रूप से करीब 35 हजार टन जीरे का उत्पादन होता है और इनकी क्वालिटी भारतीय जीरे की तुलना में हल्की होती है।

जीरा भाव में तेज़ी कब आयेगी 2023

चालू वित्त वर्ष 2023-24 के आरंभिक दो महीनों में जीरे का मात्रात्मक निर्यात 68 प्रतिशत उछलकर 42,988.50 टन का हुआ आय 205 प्रतिशत उछलकर 1502.27 करोड़ रुपए की हुई एक वर्ष पूर्व की आलोच्य अवधि में देश से 492.11 करोड़ रुपए मूल्य के 25,603 टन जीरे का निर्यात हुआ था। आगामी दिनों में जीरा सीमित दायरे में ही घूमता रहने के आसार हैं।

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